पेट की गैस: कारण, लक्षण, और उपचार
परिचय
पेट की गैस एक सामान्य समस्या है, जो किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है। इसके कारण पेट में भारीपन, दर्द और अन्य शारीरिक समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। यह लेख पेट की गैस के कारणों, इसके प्रकार, निवारण के उपाय और इससे जुड़े अन्य पहलुओं पर विस्तृत जानकारी प्रदान करता है।
पेट की गैस की समस्या आजकल बहुत आम हो गई है और आयुर्वेद में इसे लेकर विस्तार से चर्चा की गई है। आयुर्वेद के अनुसार, पाचन तंत्र की गड़बड़ी और दोषों (वात, पित्त, और कफ) के असंतुलन से पेट में गैस की समस्या उत्पन्न होती है।
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पेट की गैस क्यों होती है?
पेट में गैस बनने का मुख्य कारण पेट में भोजन का सही ढंग से न पचना है। जब भोजन पूरी तरह से नहीं पचता, तो वह आंतों में गैस उत्पन्न करता है। इसके अलावा निम्नलिखित कारणों से भी पेट में गैस हो सकती है:
- अत्यधिक तैलीय और मसालेदार भोजन का सेवन
- फास्ट फूड और प्रोसेस्ड फूड का सेवन
- अत्यधिक मात्रा में हवा निगलना (आमतौर पर जल्दी-जल्दी खाने के कारण)
- कार्बोहाइड्रेट युक्त खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन
- पानी की कमी
- अनियमित खानपान और गलत दिनचर्या
अन्य महत्वपूर्ण कारण
1.पेट का साफ नहीं होना
पेट में गैस बनने एक और महत्वपूर्ण कारण पेट का ठीक तरह से साफ नहीं होना होता है क्योंकि आंत में पूर्णतः पचा हुआ भोजन जब रखा होता है तो यह शरीर की गर्मी से या वातावरण की गर्मी से या श्रम के कारण या यूं कहे शरीर द्वारा जो लगातार काम किया जाता है इससे शरीर में गर्मी बढ़ती है जो इस भोजन को और पचा देता है जिससे पेट में गैस बनने लगती है जो कुपित होकर अन्य शारीरिक परेशानी का कारण बनता है।
2.कम मात्रा भोजन करना
एक अन्य महत्वपूर्ण कारण जब कम मात्रा में भोजन करने के बाद अत्यधिक श्रम किया जाता है या कम मात्रा में भोजन करने के बाद लम्बे समय अन्तराल तक कुछ भी भोजन नहीं किया जाता है तब भी ये भोजन अत्यधिक पच जाने पर पेट में गैस बनने का कारण बनता है।
3.पेट में कृमि
पेट में कृमि (कृमि संक्रमण) होने पर भी गैस की समस्या उत्पन्न हो सकती है। कृमि पेट में रहने वाले परजीवी होते हैं, जो पोषक तत्वों को अवशोषित कर लेते हैं साथ ही पेट को पूरी तरह से साफ नहीं होने देते है और ये रुका हुआ भोजन शरीर की गर्मी से कुपित होकर पेट में गैस, पेट दर्द, उल्टी, दस्त आदि समस्याएं पैदा करते हैं।

खाली पेट गैस बनने के कारण:
- पाचन तंत्र में वात दोष का असंतुलन (आयुर्वेदिक दृष्टिकोण): आयुर्वेद में वात दोष के असंतुलन को पेट में गैस बनने का मुख्य कारण माना जाता है। वात दोष का प्रभाव पेट की आंतों में बढ़ जाता है, जिससे गैस की समस्या होती है।
- लंबे समय तक भूखा रहना: जब हम लंबे समय तक कुछ नहीं खाते, तो पेट में हवा भरने लगती है, जिससे गैस बनने लगती है। गैस्ट्रिक एसिड भी अधिक मात्रा में बनता है, जिससे पेट में एसिडिटी और गैस होती है।
- गलत खानपान: तैलीय, मसालेदार और फास्ट फूड खाने की आदत खाली पेट में गैस बनाने में योगदान करती है। ऐसा भोजन पाचन को कमजोर करता है और पेट में गैस उत्पन्न करता है।
- अनियमित भोजन का समय: नियमित समय पर भोजन न करने से पाचन तंत्र असंतुलित हो जाता है, जिससे खाली पेट गैस बनने की समस्या बढ़ जाती है।
- तनाव और चिंता: मानसिक तनाव और चिंता भी पाचन क्रिया को प्रभावित करते हैं। इससे पेट में गैस और एसिड बनने की समस्या होती है।
- गैस्ट्रिक एसिड का उत्पादन: पेट में भोजन न होने पर भी पेट गैस्ट्रिक एसिड बनाता रहता है। यह एसिड जब खाने से प्रतिक्रिया नहीं करता, तो यह हवा के रूप में बाहर आता है, जिससे गैस और एसिडिटी की समस्या उत्पन्न होती है।
- अत्यधिक वायु निगलना (Aerophagia): कुछ लोगों को खाली पेट में अधिक हवा निगलने की आदत होती है, जिसे ‘एरोफेजिया’ कहते हैं। यह तब होता है जब आप तेजी से खाते हैं या पानी पीते हैं, जिससे हवा पेट में जमा हो जाती है और गैस बनती है।
- खाली पेट चाय या कॉफी का सेवन: बहुत से लोग सुबह खाली पेट चाय या कॉफी पीते हैं, जिससे पेट में एसिड का स्तर बढ़ जाता है। यह एसिड गैस बनने का कारण बनता है और पेट में जलन भी हो सकती है।
- फाइबर की कमी: फाइबर की कमी से भी पेट में गैस बनने की समस्या होती है। अगर आपका आहार फाइबर-युक्त नहीं है, तो पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं करता, जिससे गैस की समस्या होती है।
- शारीरिक गतिविधि की कमी: यदि आप शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं हैं, तो पाचन तंत्र सुस्त हो जाता है, जिससे गैस की समस्या हो सकती है। खाली पेट में यह समस्या और बढ़ जाती है।
- कार्बोनेटेड ड्रिंक्स का सेवन: खाली पेट में कार्बोनेटेड ड्रिंक्स (जैसे सोडा) पीने से पेट में हवा भरती है, जिससे गैस और फुलावट की समस्या होती है। इससे पाचन तंत्र में असंतुलन आ सकता है।

पेट में गैस कहां होती है?
पेट की गैस आमतौर पर पेट और आंतों में बनती है। यह गैस बड़ी आंत (कोलन) में भी उत्पन्न हो सकती है। जब भोजन आंतों में पहुंचता है और वहां सही तरीके से पचता नहीं है, तो बैक्टीरिया उस पर प्रतिक्रिया करते हैं, जिससे गैस का निर्माण होता है।
पेट की गैस के प्रकार
पेट की गैस दो प्रकार की हो सकती है:
- फ्लैटुलेंस (Flatulence): यह वह गैस है जो बड़ी आंत में उत्पन्न होती है और इसे शरीर से बाहर निकाला जाता है।
- बर्पिंग (Burping): यह गैस पेट में उत्पन्न होती है और इसे मुंह से बाहर निकाला जाता है। इसे डकार भी कहा जाता है।
पेट की गैस की जांच
यदि गैस की समस्या लगातार बनी रहती है और इससे दर्द या अन्य समस्याएं हो रही हैं, तो डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक होता है। डॉक्टर निम्नलिखित तरीकों से गैस की जांच कर सकते हैं:
- शारीरिक परीक्षण
- रक्त परीक्षण
- पेट के अल्ट्रासाउंड या एक्स-रे
- कोलोनोस्कोपी (Colon Endoscopy)
- गैस्ट्रोस्कोपी
पेट की गैस से होने वाले नुकसान

पेट की गैस के निम्नलिखित नुकसान हो सकते हैं:
- पेट में दर्द और असहजता
- डकार और पेट फूलना
- सीने में जलन एवं दर्द
- पेट में सूजन
- कमर दर्द और पीठ दर्द
- अनिद्रा
- भूख न लगना
- साँस का फूलना
पेट की गैस: आयुर्वेदिक परिभाषा
आयुर्वेद में पेट की गैस को “वायु दोष” के असंतुलन से जोड़ा गया है। वायु दोष शरीर में पाचन क्रिया को नियंत्रित करता है। जब वायु दोष असंतुलित होता है, तो इससे आंतों में गैस बनती है, जिसे हम पेट की गैस कहते हैं।
पेट की गैस के कारण (आयुर्वेदिक दृष्टिकोण)
आयुर्वेद के अनुसार, पेट में गैस बनने के कई कारण होते हैं, जो वायु दोष को असंतुलित कर सकते हैं:
- वात दोष का असंतुलन: जब वात दोष बढ़ जाता है, तो पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है और गैस की समस्या उत्पन्न होती है।
- अजीर्ण (Indigestion): जब भोजन पूरी तरह से नहीं पचता, तो आंतों में अम्लता और गैस बनने लगती है।
- गलत भोजन संयोजन: कुछ खाद्य पदार्थों का गलत संयोजन (जैसे दूध और खट्टे फलों का सेवन) पाचन को बाधित कर सकता है।
- तैलीय और भारी भोजन: अधिक तला-भुना और भारी भोजन वायु दोष को बढ़ाता है, जिससे गैस बनती है।
- अधिक भोजन का सेवन: अधिक मात्रा में भोजन करने से पाचन तंत्र पर दबाव पड़ता है और गैस बनती है।
- भोजन के बाद तुरंत सोना: खाने के तुरंत बाद सोने से पाचन धीमा हो जाता है, जिससे गैस बनने की संभावना बढ़ जाती है।
- मानसिक तनाव: मानसिक तनाव भी वात दोष को असंतुलित करता है, जिससे पेट में गैस और पाचन समस्याएं होती हैं।
पेट की गैस के प्रकार (आयुर्वेदिक दृष्टिकोण)
आयुर्वेद में गैस के विभिन्न प्रकार माने गए हैं, जो वात दोष के असंतुलन के आधार पर होते हैं:
- समान वात: जब वात दोष पाचन तंत्र में अधिक सक्रिय होता है, तो गैस बनने की संभावना बढ़ जाती है।
- अपान वात: यह पेट की गैस को बाहर निकालने का कार्य करता है। जब अपान वात अवरुद्ध हो जाता है, तो गैस शरीर में फंस जाती है और पेट में दर्द हो सकता है।
- प्राण वात: अगर प्राण वात सही तरीके से कार्य नहीं करता, तो गैस पेट में जमा हो जाती है और सांस लेने में दिक्कत हो सकती है।
पेट की गैस से नुकसान (आयुर्वेदिक दृष्टिकोण)
आयुर्वेद में माना गया है कि अगर पेट की गैस का सही समय पर इलाज न किया जाए, तो यह शरीर के विभिन्न अंगों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है:
- पाचन तंत्र पर प्रभाव : पाचन क्रिया धीमी हो जाती है और अजीर्ण, कब्ज, और एसिडिटी जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं।
- आंतों पर दबाव : आंतों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) जैसी बीमारी हो सकती है।
- मानसिक स्वास्थ्य : पेट की गैस मानसिक तनाव, चिड़चिड़ापन, और नींद की कमी का कारण बन सकती है।
- हृदय पर प्रभाव : अत्यधिक गैस हृदय के चारों ओर दबाव डाल सकती है, जिससे हृदय संबंधित समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
- वात रोग : हड्डियों में,जोड़ो में,कमर या पीठ में जकड़न और दर्द।
- ब्लड प्रेशर : आयुर्वेद में, शरीर के तीन दोष—वात, पित्त और कफ—का असंतुलन ब्लड प्रेशर की समस्या का कारण माना जाता है। वात दोष के असंतुलन से हृदय और रक्त वाहिकाओं की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, जो ब्लड प्रेशर को प्रभावित करता है।
- साँस, दमा, अस्थमा : फेफड़े एवं वायुमार्ग में गैस के दबाव के कारण साँस का फूलना, जो अस्थमा का कारण भी बनता है।

पेट की गैस से होने वाले फायदे
आम तौर पर, पेट की गैस किसी भी प्रकार का फायदा नहीं देती। लेकिन जब पेट में हवा जमा हो जाती है, तो इसे निकालने से पेट का भारीपन कम हो जाता है और आराम महसूस होता है।
गैस से प्रभावित होने वाले अंग
पेट की गैस मुख्य रूप से निम्नलिखित अंगों को प्रभावित कर सकती है:
- पेट
- आंतें
- बड़ी आंत (कोलन)
- फेफड़े (कभी-कभी गैस से दबाव बढ़ने पर सांस लेने में कठिनाई हो सकती है)
पेट की गैस से होने वाली बीमारियां
यदि पेट की गैस को नजरअंदाज किया जाता है या इसका उपचार सही समय पर नहीं किया जाता, तो इससे निम्नलिखित बीमारियां हो सकती हैं:
- एसिडिटी
- अल्सर
- इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS)
- पेट में संक्रमण
- गैस्ट्राइटिस
पेट की गैस के एलोपैथिक उपाय
एलोपैथिक चिकित्सा में पेट की गैस से राहत पाने के लिए निम्नलिखित दवाएं दी जाती हैं:
- एंटासिड्स (Antacids)
- गैस्ट्रिक एंजाइम्स (Gastric Enzymes)
- प्रोबायोटिक्स (Probiotics)
- साइमेथिकोन (Simethicone)
- हाइड्रोक्साइड्स (Magnesium Hydroxide)
पेट की गैस के आयुर्वेदिक उपचार

आयुर्वेद में पेट की गैस के लिए कई प्रभावी उपचार दिए गए हैं, जो पाचन तंत्र को सुधारने और वात दोष को संतुलित करने में मदद करते हैं:
- अजवाइन और सौंफ: अजवाइन में पाचन एंजाइम्स होते हैं, जो गैस और सूजन को कम करते हैं। भोजन के बाद सौंफ का सेवन करने से पाचन सुधारता है।
- हींग का उपयोग: हींग वात दोष को संतुलित करता है और पेट में गैस की समस्या को कम करता है। एक गिलास गर्म पानी में चुटकी भर हींग मिलाकर पीने से तुरंत राहत मिलती है।
- त्रिफला चूर्ण: त्रिफला एक आयुर्वेदिक औषधि है, जो पाचन को बेहतर बनाती है और आंतों से गैस को बाहर निकालने में मदद करती है। त्रिफला को रात में सोने से पहले गुनगुने पानी के साथ लें।
- अदरक: अदरक वात और पित्त दोष को संतुलित करता है और पेट की गैस को कम करता है। अदरक का रस शहद के साथ मिलाकर खाने से गैस और अपच में राहत मिलती है।
- शंखवटी: यह आयुर्वेदिक औषधि पाचन में सुधार करती है और गैस को कम करती है। शंखवटी को भोजन के बाद लिया जा सकता है।
- हिंग्वाष्टक चूर्ण: यह चूर्ण वात दोष को संतुलित करता है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। भोजन से पहले हिंग्वाष्टक चूर्ण का सेवन करने से गैस की समस्या नहीं होती।
- जीरा: जीरे का सेवन करने से भी गैस की समस्या से निजात मिलती है।
पेट की गैस के घरेलू उपाय

- तुलसी के पत्ते: तुलसी वात दोष को संतुलित करती है। गैस से राहत पाने के लिए 5-6 तुलसी के पत्तों को चबाएं या इसका काढ़ा बनाकर पिएं।
- नींबू पानी: सुबह खाली पेट नींबू पानी पीने से पाचन तंत्र को साफ करता है और गैस बनने की संभावना को कम करता है।
- पानी का सही सेवन: पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से पाचन सही रहता है और गैस की समस्या कम होती है। लेकिन खाने के तुरंत बाद पानी पीने से बचें।
- जीरा और सौंठ: जीरा और सौंठ का पाउडर गैस को नियंत्रित करने में मदद करता है। इसे भोजन के बाद गुनगुने पानी के साथ लें।
- पानी पीना: गैस बनने से रोकने के लिए दिनभर में पर्याप्त पानी पीएं।
- अदरक का सेवन: अदरक का रस या अदरक की चाय पीने से पेट में गैस नहीं बनती।
- हल्दी का सेवन: हल्दी पेट के लिए बहुत लाभकारी होती है, यह पाचन में सुधार करती है।
पेट की गैस के लिए योग

- पवनमुक्तासन: यह आसन पेट की गैस को बाहर निकालने में बहुत प्रभावी है। इसे रोजाना सुबह करने से गैस की समस्या कम होती है।
- वज्रासन: भोजन के बाद 10-15 मिनट तक वज्रासन में बैठने से पाचन बेहतर होता है और गैस नहीं बनती।
- कपालभाति प्राणायाम: यह प्राणायाम पेट को मजबूत बनाता है और गैस की समस्या से राहत दिलाता है।
- अर्धमत्स्येन्द्रासन: यह आसन पेट के अंगों को दबाव देता है और गैस को बाहर निकालने में मदद करता है।
- पश्चिमोत्तानासन: इस आसन से पेट की आंतों पर दबाव पड़ता है, जिससे गैस की समस्या कम होती है।
पेट की गैस के लिए डाइट: क्या खाएं और क्या न खाएं
क्या खाएं:
- ताजे फल और सब्जियां
- हल्का और सुपाच्य भोजन
- अदरक, अजवाइन और हींग का सेवन
- दही और प्रोबायोटिक युक्त आहार

क्या न खाएं:
- तली और मसालेदार चीजें
- अधिक मात्रा में कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन
- प्रोसेस्ड फूड और फास्ट फूड
- शराब और कार्बोनेटेड पेय
पेट की गैस के लिए आयुर्वेदिक दवाएं
- त्रिफला चूर्ण
- हिंग्वष्टक चूर्ण
- अजवाइन और सौंफ का मिश्रण
- शंखवटी
पेट की गैस के लिए एलोपैथिक दवाएं

- ओमेप्राज़ोल (Omeprazole)
- रैनीटिडिन (Ranitidine)
- डोम्पेरिडोन (Domperidone)
- साइमेथिकोन (Simethicone)
पेट की गैस के लिए घरेलू दवाएं
- अदरक और नींबू का रस
- जीरे और अजवाइन का काढ़ा
- हींग और गर्म पानी का मिश्रण
निष्कर्ष
पेट की गैस एक सामान्य समस्या है, लेकिन इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। सही खानपान, नियमित व्यायाम, और घरेलू व आयुर्वेदिक उपायों से इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से, पेट की गैस वात दोष के असंतुलन के कारण होती है। सही आहार, जीवनशैली और आयुर्वेदिक उपचार से इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है। नियमित रूप से योग और पाचन में सुधार करने वाले घरेलू नुस्खों का पालन करके पेट की गैस की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।अगर समस्या बनी रहती है, तो डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।
डिस्क्लेमर
यह ब्लॉग केवल सामान्य जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से है और इसे चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। पेट में गैस की समस्या या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के लिए, कृपया अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लें। यहां दी गई जानकारी और सुझावों का उपयोग आपके व्यक्तिगत स्वास्थ्य की स्थिति और आवश्यकता के आधार पर किया जाना चाहिए। लेखक और वेबसाइट किसी भी उपचार या दवाइयों से संबंधित परिणामों या नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे। हमेशा पेशेवर चिकित्सा सलाह का पालन करें।
